कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई ) ने आज नई दिल्ली के कौशल भवन में केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) की राष्ट्रीय समीक्षा बैठक आयोजित की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में अप्रेंटिसशिप संबंधी जुड़ाव को मजबूत करना और अप्रेंटिसशिप को सीखने से लेकर आजीविका तक के एक मुख्य रास्ते के रूप में स्थापित करना था।
समीक्षा में इस बात पर जोर दिया गया कि अप्रेंटिसशिप को केवल कोई और रास्ता न बचने की स्थिति में अपनाए जाने वाले एक ‘विकल्प’ के रूप में नहीं , बल्कि एक भरोसेमंद और आकर्षक रास्ते के रूप में देखा जाना चाहिए। इसमें सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ-साथ कार्यस्थल का व्यावहारिक अनुभव भी शामिल होता है , जिससे युवा उद्योग के लिए जरूरी कौशल सीख सकते हैं और नौकरी के लिए पूरी तरह तैयार हो सकते हैं।
केवल पैमाने से ध्यान हटाकर ठोस परिणामों पर केन्द्रित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए , कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय की सचिव श्रीमती देबाश्री मुखर्जी ने कहा: “अप्रेंटिसशिप को सीखने से लेकर आजीविका तक का एक मुख्य और आकर्षक रास्ता बनना चाहिए। जैसे-जैसे यह इकोसिस्टम बढ़ता है , हमारा ध्यान केवल प्रशिक्षुओं की संख्या के बजाय इस बात पर होना चाहिए कि अप्रेंटिसशिप युवाओं को क्या बनने में सक्षम बनाती है। केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (सीपीएसई) गुणवत्तापूर्ण अवसरों का विस्तार करके , महिलाओं एवं कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों की भागीदारी बढ़ाकर और सार्थक रोजगार के लिए मजबूत रास्ते तैयार करके एक उत्प्रेरक की भूमिका निभा सकते हैं। हमारी सामूहिक सफलता को अंततः अप्रेंटिसशिप पूरी करने , प्रमाणन , रोजगार पाने की क्षमता , कार्यस्थल में शामिल होने और वहां बने रहने के आधार पर आंका जाना चाहिए। ”
