Skip to content
BREAKING

“वेटनरी मेडिसन इन दी डिजिटल ऐरा” विषयक राष्ट्रीय सिम्पोजियम आयोजित

Updated:

पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय आय और रोजगार का बहुत बड़ा आधार

“वेटनरी मेडिसन इन दी डिजिटल ऐरा” विषयक राष्ट्रीय सिम्पोजियम आयोजित
— सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, राजस्थान
  • पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय आय और रोजगार का बहुत बड़ा आधार
  • पशु चिकित्सा और पशुधन संरक्षण में भी राजस्थान देशभर में अग्रणी बने- राज्यपाल

जयपुर, 26 अक्टूबर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि भारत में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय आय और रोजगार का बहुत बड़ा आधार है। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि राजस्थान दुग्ध उत्पादन में पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने पशुपालकों के लिए राज्य में 'मुख्यमंत्री दुग्ध संबल योजना' और सरस डेयरी के विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि पशु चिकित्सा और पशुधन संरक्षण में भी राजस्थान देशभर में अग्रणी बने। उन्होंने दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को वैज्ञानिक तरीके से संतुलित आहार के साथ उनकी उचित स्वास्थ्य एवं नस्ल की देखभाल करने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।

राज्यपाल सोमवार को राजस्थान पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, जोबनेर में “वेटनरी मेडिसन इन दी डिजिटल ऐरा” विषयक राष्ट्रीय सिम्पोजियम में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमता के युग में पशुओं के स्वास्थ्य से जुड़े सतत विकास के आलोक में राष्ट्रीय सिम्पोजियम को महत्वपूर्ण बताया।

श्री बागडे ने कहा कि यह बड़ी बात है कि राजस्थान में देश का सर्वाधिक देशी पशुधन है। उन्होंने इसके अंतर्गत राठी, थारपारकर आदि गायों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इनके दूध की क्वालिटी बाहर की गायों से बेहतर है।

श्री बागडे ने कहा कि पशुओं के रोग का निदान मनुष्य से अधिक कठिन होता है। आदमी अपने रोग, पीड़ा को कहकर बता सकता है परंतु जानवर तो बता नहीं सकते। इसलिए पशु चिकित्सकों की भूमिका अधिक महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने पशु चिकित्सकों से पशुओं के रोग निदान में मानवीय रहते हुए कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए भी विशेष रूप से कार्य किए जाने पर जोर दिया।

राज्यपाल ने कहा कि दूध का बड़े पैमाने पर उपयोग मिठाई निर्माण के लिए होता है। राजस्थान से मिठाई का विदेशों में भी निर्यात होता है। उन्होंने दूध उत्पादन में छोटे काश्तकारों, गरीबों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि उनके प्रोत्साहन के लिए अधिक से अधिक कार्य किया जाए।

राज्यपाल श्री बागडे ने केन्द्र सरकार के राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन की चर्चा करते हुए कहा कि पशुपालकों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके अंतर्गत हमारे देश में 35 करोड़ से अधिक पशुओं को 12 अंकों की विशिष्ट 'पशु आधार' सुविधा दी जा रही है। यह डिजिटल पहचान पशु के संपूर्ण स्वास्थ्य रिकॉर्ड और टीकाकरण की दृष्टि से बहुत काम की है। उन्होंने पशु चिकित्सकों को परंपरागत रोग निदान प्रणालियों के साथ आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों का मेल करते हुए पशुधन संरक्षण में अपना योगदान देने का आह्वान किया।

इससे पहले राज्यपाल ने पशु चिकित्सा और पशुविज्ञान में विशिष्ट योगदान देने वालो को सम्मानित किया। कुलगुरु प्रो. त्रिभुवन शर्मा ने राष्ट्रीय सिंपोजियम के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

डॉ.राजेश व्यास/सविता

स्रोत: Times of Rajasthan

Source: Times of Rajasthan

Share

Comments

0 / 1200

Comments close 30 days after publication.

Related News