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मोदी सरकार ने चुकाई ऑयल बॉन्ड की पूरी देनदारी

मार्च 2026 तक ₹2.36 लाख करोड़ का किया भुगतान

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मनमोहन सिंह सरकार के कार्यकाल में जारी हुए थे ऑयल बॉन्ड, पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों में बकाया देनदारी समाप्त

मोदी सरकार ने चुकाई ऑयल बॉन्ड की पूरी देनदारी

Highlights

  1. यूपीए सरकार के कार्यकाल में जारी किए गए थे ऑयल बॉन्ड
  2. 2,36,368.28 करोड़ रुपये का किया गया भुगतान
  3. क्या पड़ा इसका आर्थिक असर?

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में जारी किए गए ऑयल बॉन्ड की देनदारियों का भुगतान पूरा कर दिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक इन बॉन्ड के मूलधन और ब्याज के रूप में कुल 2,36,368.28 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। मंत्रालय के मुताबिक, इसके बाद इन ऑयल बॉन्ड की कोई देनदारी बकाया नहीं रही।

ऑयल बॉन्ड का मुद्दा लंबे समय से देश की आर्थिक नीतियों और पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर चर्चा में रहा है। इन बॉन्ड को जारी करने का उद्देश्य उस समय तेल कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई करना था, जब सरकार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तत्काल बड़ी वृद्धि से बचना चाहती थी।

क्या थे ऑयल बॉन्ड?

वर्ष 2005-06 से 2009-10 के बीच तत्कालीन यूपीए सरकार ने तेल कंपनियों को वित्तीय राहत देने के लिए ऑयल बॉन्ड जारी किए थे। पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियों को नकद भुगतान करने के बजाय सरकार ने विशेष ऋण-पत्र जारी किए। इन बॉन्ड पर ब्याज देना और निर्धारित समय पर मूलधन चुकाना सरकार की जिम्मेदारी थी।

इस व्यवस्था से तत्काल सरकारी नकदी पर पड़ने वाला दबाव कम हुआ, लेकिन भविष्य में ब्याज और मूलधन के भुगतान की देनदारी बनी रही।

कितना हुआ भुगतान?

पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2005-06 से 2009-10 के दौरान कुल 1,48,187.30 करोड़ रुपये के ऑयल बॉन्ड जारी किए गए थे। मार्च 2026 तक इनके भुगतान का विवरण इस प्रकार है:

- मूलधन का भुगतान: 1,34,423.17 करोड़ रुपये।

- ब्याज का भुगतान: 1,01,945.11 करोड़ रुपये।

इन आंकड़ों के अनुसार, ऑयल बॉन्ड से संबंधित बकाया देनदारी का निपटारा हो चुका है। हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रसारित 3.23 लाख करोड़ रुपये के कुल भुगतान के दावे से सरकारी आंकड़ों में दी गई राशि मेल नहीं खाती।

क्या पड़ा इसका आर्थिक असर?

ऑयल बॉन्ड की देनदारी का भुगतान सरकारी वित्तीय प्रबंधन के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इस व्यवस्था के तहत पूर्ववर्ती सरकार के समय लिए गए वित्तीय दायित्वों को बाद के वर्षों में पूरा किया गया। भुगतान की वास्तविक लागत में मूलधन के साथ ब्याज भी शामिल था।

यह मुद्दा इस बात को भी रेखांकित करता है कि ईंधन की कीमतों को तत्काल नियंत्रित रखने के लिए अपनाई गई नीतियों का वित्तीय असर कई वर्षों तक बना रह सकता है।

पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक ऑयल बॉन्ड के मूलधन और ब्याज सहित 2.36 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका था और इन बॉन्ड की कोई देनदारी बकाया नहीं रही।

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