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पेरिस में हिंसक प्रदर्शन से बिगड़े हालात, आगजनी और लूटपाट के बाद कर्फ्यू

लेखक Piyush purohit

अपडेट:

पेरिस, 20 अक्टूबर। फ्रांस की राजधानी पेरिस सहित कई प्रमुख शहरों में हिंसक प्रदर्शनों के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन की लागत और शिक्षा व्यवस्था की…

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पेरिस में हिंसक प्रदर्शन से बिगड़े हालात, आगजनी और लूटपाट के बाद कर्फ्यू

मुख्य बातें

  1. महंगाई और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग
  2. फ्रांस में 2,500 से अधिक हिरासत में
  3. दुकानों में लूटपाट, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान

पेरिस, 20 अक्टूबर। फ्रांस की राजधानी पेरिस सहित कई प्रमुख शहरों में हिंसक प्रदर्शनों के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। बढ़ती महंगाई, जीवन-यापन की लागत और शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शन कई स्थानों पर आगजनी, तोड़फोड़ और लूटपाट में बदल गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

दुकानों में लूटपाट, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान

सप्ताहांत के दौरान प्रदर्शनकारियों के समूहों ने कई शहरों में दुकानों और सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाया। वाहनों में आग लगाने और पुलिस से भिड़ंत की घटनाएं सामने आईं। लिमोज शहर में ऐतिहासिक सिटी हॉल भी आग की चपेट में आ गया। अधिकारियों के अनुसार, हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों, जेंडरमेरी के जवानों और अग्निशमन कर्मियों को चोटें आईं।

2,500 से अधिक लोग हिरासत में

20 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, फ्रांस में हिंसा के सिलसिले में 2,500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। सरकार ने सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और दुकानों में लूटपाट करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा है कि जरूरत के अनुसार अलग-अलग इलाकों में कर्फ्यू लगाया जाएगा।

पेरिस के कुछ इलाकों में प्रतिबंध

हिंसा को नियंत्रित करने के लिए पेरिस के कुछ क्षेत्रों में रात के समय प्रतिबंध लगाए गए। प्रशासन ने कुछ स्थानों पर सभाओं और प्रदर्शनों पर भी रोक लगाई। सरकार का प्रयास है कि व्यापारिक प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा सामान्य जनजीवन बहाल हो सके। हालांकि, इन उपायों के बावजूद आगे फिर प्रदर्शन होने की आशंका बनी हुई है। <"]}/>

महंगाई और सरकारी नीतियों पर बढ़ता असंतोष

प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में छात्र और अन्य नागरिक शामिल हुए। छात्रों की मांगों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और बेहतर सुविधाएं शामिल हैं, जबकि अन्य प्रदर्शनकारी बढ़ती कीमतों और जीवन-यापन के खर्च से नाराज हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन किया है। सरकार के सामने अब कानून-व्यवस्था बहाल करने के साथ जनता की आर्थिक और सामाजिक चिंताओं का समाधान करने की चुनौती है।

फिलहाल प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और प्रभावित कारोबारियों को राहत देने पर ध्यान दे रहा है। आने वाले दिनों में प्रस्तावित प्रदर्शनों और सरकार की कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि फ्रांस में हालात कितनी जल्दी सामान्य हो पाते हैं।

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