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देशभर में आज मनाया जा रहा रक्षाबंधन पर्व, भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है राखी

लेखक Administrator

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नई दिल्ली/ जयपुर । भाई-बहन के पवित्र प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व आज, शुक्रवार 28 अगस्त को देशभर में पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। श्रावण…

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देशभर में आज मनाया जा रहा रक्षाबंधन पर्व, भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है राखी

मुख्य बातें

  1. भाई-बहन के पवित्र प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व
  2. रक्षाबंधन के मौके पर सुबह से ही बाजारों में चहल-पहल
  3. भाइयों की सुख-समृद्धि, लंबी आयु और मंगलमय जीवन की कामना करती है बहने

नई दिल्ली/ जयपुर । भाई-बहन के पवित्र प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व आज, शुक्रवार 28 अगस्त को देशभर में पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। श्रावण मास की पूर्णिमा के अवसर पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुख-समृद्धि, लंबी आयु और मंगलमय जीवन की कामना कर रही हैं। भाई भी बहनों की रक्षा और हर परिस्थिति में उनके साथ खड़े रहने का संकल्प लेते हुए उपहार भेंट कर रहे हैं।

रक्षाबंधन के मौके पर सुबह से ही बाजारों में चहल-पहल रही। राखी, मिठाइयों, पूजा सामग्री और उपहारों की दुकानों पर लोगों की भीड़ देखी गई। रंग-बिरंगी राखियों से सजे बाजारों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में पर्व को लेकर खास उत्साह नजर आया। कई परिवारों में दूर रहने वाले भाई-बहन भी इस अवसर पर एक-दूसरे से मिलने के लिए घर पहुंचे।

रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी के रिश्ते को मजबूत करने वाला त्योहार माना जाता है। बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है और उसके सुखी एवं सुरक्षित जीवन की कामना करती है। इसके बदले भाई बहन की रक्षा और उसके सुख-दुख में साथ देने का संकल्प करता है।

सुबह के समय राखी बांधने का शुभ अवसर-इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रही। पंचांग के अनुसार रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने के लिए सुबह का समय विशेष रूप से शुभ माना गया है। अलग-अलग पंचांगों में स्थानीय समय के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर बताया गया है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय का पालन करने की परंपरा है।

रक्षाबंधन की पूजा में बहनें थाली सजाकर उसमें राखी, रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक और मिठाई रखती हैं। भाई को तिलक लगाने और आरती करने के बाद उसकी कलाई पर राखी बांधी जाती है। इसके बाद भाई का मुंह मीठा कराया जाता है और दोनों एक-दूसरे के सुखी जीवन की कामना करते हैं।

चंद्रग्रहण को लेकर भी चर्चा-इस बार रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण की खगोलीय घटना भी हो रही है, जिसके कारण पर्व को लेकर लोगों में विशेष जिज्ञासा है। हालांकि उपलब्ध खगोलीय जानकारी के अनुसार यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में ग्रहण से जुड़े धार्मिक नियमों को लेकर अलग-अलग परंपराएं और मान्यताएं प्रचलित हैं।

देश के अलग-अलग हिस्सों में रक्षाबंधन की अपनी विशेष परंपराएं भी हैं। कहीं बहनें भाई को राखी बांधने के बाद मिठाई खिलाती हैं तो कहीं परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जाता है। कई स्थानों पर सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की ओर से सामूहिक रक्षाबंधन कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

रक्षाबंधन का पर्व बदलते समय के साथ अपने स्वरूप में भले ही बदलाव देख रहा हो, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और विश्वास की भावना आज भी उतनी ही मजबूत है। यही कारण है कि देश ही नहीं, विदेशों में रहने वाले भारतीय परिवार भी इस पर्व को उत्साहपूर्वक मनाते हैं।

रक्षाबंधन का संदेश केवल भाई की ओर से बहन की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक-दूसरे के सम्मान, सहयोग और साथ निभाने की भावना का पर्व है। यही भावना परिवार और समाज के रिश्तों को मजबूत बनाती है।

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