

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर असम पुलिस की टीम पहुंची है। यह घटना असम विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार के आखिरी चरण में उठे विवाद से जुड़ी है।पूरा मामला क्या है?
- पृष्ठभूमि: 5 अप्रैल 2026 को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग प्रमुख पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा पर गंभीर आरोप लगाए थे। खेड़ा ने दावा किया कि रिनिकी सरमा के पास तीन देशों (संयुक्त अरब अमीरात – UAE, एंटीगुआ और बारबुडा, तथा मिस्र) के सक्रिय पासपोर्ट हैं। साथ ही उन्होंने विदेश में अघोषित संपत्तियों और अमेरिका में बड़ी कंपनी (52,000 करोड़ रुपये) का भी आरोप लगाया था। कांग्रेस ने इसे चुनावी हलफनामे में छिपाने का मुद्दा बनाया।
- सरमा परिवार का जवाब: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन आरोपों को पूरी तरह फर्जी, डिजिटली मनिपुलेटेड और पाकिस्तानी सोशल मीडिया ग्रुप्स से सप्लाई बताया। उन्होंने कहा कि UAE पासपोर्ट जैसा दिखाया गया दस्तावेज वास्तव में गोल्डन वीजा/रेजिडेंसी कार्ड हो सकता है, पासपोर्ट नहीं। दुबई सरकार और भारतीय राजनयिक चैनलों से भी इन दस्तावेजों को फर्जी पाया गया। सरमा ने चेतावनी दी कि पवन खेड़ा को असम की जेल में अपना “बचा हुआ जीवन” बिताना पड़ सकता है।
- FIR दर्ज: रिनिकी भुयान सरमा ने 6 अप्रैल की रात को गुवाहाटी के पानबाजार पुलिस स्टेशन (क्राइम ब्रांच) में पवन खेड़ा और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कराई। शिकायत में आरोपों को “झूठा, दुर्भावनापूर्ण और फर्जी दस्तावेजों पर आधारित” बताया गया। FIR में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करना, आपराधिक षड्यंत्र और चुनाव प्रभावित करने जैसे प्रावधान शामिल हो सकते हैं।
7 अप्रैल 2026 की घटना: पुलिस का पहुंचना
- मंगलवार सुबह असम पुलिस की एक टीम दिल्ली पुलिस के साथ पवन खेड़ा के दिल्ली आवास पर पहुंची।
- टीम FIR के सिलसिले में पूछताछ और तलाशी के लिए गई थी।
- सूत्रों के अनुसार, पवन खेड़ा उस समय घर पर नहीं थे (कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि वे हैदराबाद चले गए हैं)।
- पुलिस टीम ने घर की तलाशी ली और संबंधित दस्तावेज/सबूत जुटाने की कोशिश की।
- यह कार्रवाई असम पुलिस के क्राइम ब्रांच द्वारा की जा रही है, जो मामले की जांच कर रही है।
दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं
- कांग्रेस पक्ष: आरोपों को मजबूत बताते हुए कहा कि और सबूत पेश किए जाएंगे। पार्टी ने इसे सत्ताधारी BJP की दबाव वाली कार्रवाई करार दिया और राजनीतिक प्रतिशोध बताया।
- BJP/सरमा पक्ष: इसे कानूनी प्रक्रिया बताया। CM सरमा ने कहा कि झूठ फैलाने वालों को कानून का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कांग्रेस पर चुनाव हारने की हताशा में फर्जी आरोप लगाने का आरोप लगाया।
यह मामला अभी जांच के अधीन है। असम चुनाव (मतदान 9 अप्रैल 2026) से ठीक पहले यह विवाद राजनीतिक माहौल को और गरमा रहा है। पुलिस की कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने इसे “दमन” बताया, जबकि सत्ताधारी दल इसे “कानून का राज” करार दे रहा है।विवाद अभी जारी है और आगे की कानूनी/राजनीतिक गतिविधियों पर नजरें टिकी हुई हैं।