राजस्थान उच्च न्यायालय ने सहायक अभियंता इंद्राज के खिलाफ वित्तीय वसूली की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई, क्योंकि विभागीय जांच नहीं की गई थी। अदालत ने पंचायती राज विभाग के सचिव, दौसा के जिला प्रमुख और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा।
विरोधी पक्ष ने बताया कि 2014‑2018 के दौरान ग्राम पंचायत बालाहेड़ा में विकास एवं निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं के आधार पर वसूली के निर्देश दिए गए थे। पंचायती राज विभाग ने उन कार्यों में गड़बड़ी का हवाला देते हुए इंद्राज को राशि जमा करने का आदेश दिया और जमा न होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी।
विधिक दलीलें
इंद्राज के अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने कहा कि राजस्थान सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम, 1958 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना ही वसूली शुरू की गई। उन्होंने तर्क दिया कि विभागीय जांच के बिना वित्तीय जिम्मेदारी तय करना नियमों के विरुद्ध है।
