41 में से 10 जिला प्रमुख पद अनारक्षित
जयपुर: राजस्थान में आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर गुरुवार, 13 अगस्त को आरक्षण की लॉटरी निकाली गई। इस प्रक्रिया के साथ ही प्रदेश की 41 जिला परिषदों के जिला प्रमुख पदों पर आरक्षण की स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। लॉटरी के बाद कई जिलों में चुनावी समीकरण बदल गए हैं और संभावित दावेदारों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
जिला प्रमुख पदों के आरक्षण की यह लॉटरी जयपुर स्थित इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान में आयोजित की गई। पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के साथ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहे। इसके जरिए यह तय किया गया कि 41 जिलों में जिला प्रमुख का पद किस वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा।
41 में से 10 जिला प्रमुख पद अनारक्षित
आरक्षण लॉटरी में 41 जिला प्रमुख पदों में 10 पद अनारक्षित रखे गए हैं। वहीं 19 पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसका सीधा असर राजनीतिक दलों की टिकट रणनीति पर पड़ेगा। अनारक्षित सीटों पर किसी भी वर्ग के उम्मीदवार को चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा, जबकि आरक्षित सीटों पर संबंधित वर्ग के उम्मीदवार ही दावेदारी कर सकेंगे।
जयपुर, जोधपुर और भरतपुर जैसे प्रमुख जिलों के जिला प्रमुख पद अनारक्षित रखे जाने से इन जिलों में दावेदारों के बीच मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। अब राजनीतिक दल स्थानीय स्तर पर मजबूत चेहरों की तलाश और संभावित प्रत्याशियों की छंटनी में जुटेंगे।
OBC आरक्षण की तस्वीर भी हुई स्पष्ट
पंचायती राज चुनावों में जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, प्रधान और सरपंच पदों के आरक्षण को लेकर भी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। OBC आरक्षण के संबंध में आयोग की सिफारिश के मुताबिक प्रदेश की 41 जिला परिषदों के 1,403 वार्डों में 192 सीटें OBC के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव है। यह कुल सीटों का करीब 13.68 प्रतिशत है।
जयपुर और सीकर में जिला परिषद की 10-10 सीटें OBC के लिए प्रस्तावित हैं। जोधपुर और जालौर में 9-9, जबकि भीलवाड़ा, बीकानेर, चूरू और झुंझुनूं में 8-8 सीटें OBC के लिए प्रस्तावित की गई हैं।
चार जिलों में OBC आरक्षण शून्य
आरक्षण के गणित में इस बार कुछ जिलों की स्थिति अलग है। आयोग की सिफारिश के अनुसार बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर में जिला परिषद सीटों पर OBC आरक्षण शून्य रखा गया है। रिपोर्ट के अनुसार इन क्षेत्रों में SC-ST के लिए पहले से मौजूद आरक्षण और ST आबादी के अनुपात के कारण OBC के लिए सीट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति बनी।
लॉटरी के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
आरक्षण की तस्वीर सामने आने के साथ ही भाजपा और कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक दलों में टिकट को लेकर गतिविधियां तेज होने की संभावना है। जिन नेताओं की सीट आरक्षित श्रेणी में आ गई है, उन्हें अब नए राजनीतिक विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं, जबकि आरक्षित वर्ग के स्थानीय नेताओं के लिए चुनावी मैदान में उतरने का रास्ता खुल सकता है।
पंचायती राज चुनावों में जिला प्रमुख के साथ-साथ प्रधान, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच और पंच के पद भी महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद गांवों से लेकर जिला स्तर तक चुनावी समीकरण तेजी से बदलने की उम्मीद है।
चुनावी तैयारियां अंतिम चरण में
राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव 2026 को लेकर निर्वाचन आयोग पहले से तैयारियां कर रहा है। आयोग की आधिकारिक अधिसूचना सूची में पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनाव 2026 से संबंधित तैयारियों और निर्वाचन प्रक्रिया के निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
गुरुवार की आरक्षण लॉटरी के बाद अब संभावित प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों की नजर पंचायत स्तर की बाकी आरक्षण प्रक्रियाओं पर है। आरक्षण की अंतिम तस्वीर साफ होते ही टिकट के दावेदारों की सक्रियता और चुनावी सरगर्मी और बढ़ने की संभावना है।