यमुना जल समझौता : राजस्थान को मिलेगा 577 एमसीएम पानी, ₹34 हजार करोड़ की परियोजना पर हुए हस्ताक्षर

Yamuna Water Agreement: Rajasthan to Receive 577 MCM of Water; ₹34,000 Crore Project Signed

तीन दशक की प्रतीक्षा के बाद राजस्थान और हरियाणा ने ₹34,102 करोड़ के यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर किए। 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन से 577 एमसीएम पानी चूरू तक पहुँचेगा — प्यासे शेखावाटी के लिए यह महज़ एक करार नहीं, एक पीढ़ी की उम्मीद है।

नई दिल्ली,एनएसआई मीडिया। नई दिल्ली में 29 जून 2026 को राजस्थान और हरियाणा के बीच बहुप्रतीक्षित यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर हो गए। यह एक ऐसी परियोजना है जो लगभग तीन दशकों से लंबित थी। ₹34,102 करोड़ की अनुमानित लागत वाली यह योजना राजस्थान के जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों, विशेषकर शेखावाटी अंचल, के लिए जल सुरक्षा की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

समझौते में क्या शामिल है
इस समझौते के तहत राजस्थान के हिस्से का 577 एमसीएम यमुना जल हरियाणा स्थित हथिनीकुंड बैराज से निकालकर 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली के ज़रिये चूरू ज़िले के हंसियावास जलाशय तक पहुँचाया जाएगा। परियोजना में 3.6 मीटर व्यास की तीन भूमिगत पाइपलाइनें, निरीक्षण सड़क, कृत्रिम जलाशय और आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा में भी दस स्थानों पर पेयजल उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है, जिससे यह परियोजना दोनों राज्यों के लिए साझा लाभ की बनती है।

गृह मंत्री शाह रहे मौजूद
समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी उपस्थित रहे। दोनों राज्यों एवं केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद थे।

राजस्थान सरकार द्वारा परियोजना की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार कर केंद्रीय जल आयोग के ई-पीएएमएस पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है। हरियाणा द्वारा पाइपलाइन अलाइनमेंट को सैद्धांतिक स्वीकृति भी प्रदान की जा चुकी है।

सरकार की प्रतिक्रिया
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विश्वास है कि ‘जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन, विकास और आने वाली पीढ़ियों की समृद्धि की आधारशिला है।’ उन्होंने इस समझौते को नर्मदा परियोजना, जल जीवन मिशन और केन-बेतवा लिंक परियोजना जैसी पहलों की श्रृंखला में एक और मील का पत्थर बताया।

शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका की विशेष सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने दोनों राज्यों के बीच ‘विश्वास, संवाद और समन्वय का सेतु’ बनाकर इस जटिल विषय का समाधान संभव बनाया। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के तकनीकी एवं प्रशासनिक योगदान की भी सराहना की गई।

क्रियान्वयन का ढाँचा
परियोजना के निर्माण एवं संचालन के लिए राजस्थान हरियाणा यमुना वाटर परियोजना-एसपीवी (आरएचवाईडब्ल्यू-एसपीवी) का गठन किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और पेयजल संकट गहराता जा रहा है।

आम जनता पर क्या होगा असर-
गौरतलब है कि राजस्थान का यह क्षेत्र दशकों से जल की कमी झेलता आया है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर चूरू सहित आसपास के जल-संकटग्रस्त ज़िलों में पेयजल एवं सिंचाई की स्थिति में सुधार की उम्मीद है। मुख्यमंत्री शर्मा ने विश्वास जताया कि यह परियोजना शेखावाटी सहित प्रदेश के जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास को नई गति प्रदान करेगी। अब निगाहें एसपीवी के गठन और निर्माण कार्य की समयसीमा पर टिकी हैं।

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